ऑनलाइन शिक्षा लाभदायक या घातक-सुमन शर्मा

ऑनलाइन  शिक्षा लाभदायक या घातक 
          सभी के लिए शिक्षा , गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा व  दूरस्थ शिक्षा के लिए ऑनलाइन शिक्षा  कोविड १९ के पहले भी एक विकल्प के रूप में लोकप्रिय व आवश्यक था , अब जब ऑनलाइन शिक्षा आज की जरूरत बन गई है तब भी इसे वैकल्पिक, अस्थायी तथा सहयोगी शिक्षा प्रणाली के रूप में ही  एक बेहतर विकल्प के रूप में देखा जाना चाहिए।  
आज ऑनलाइन शिक्षा ने दिद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़े रखा है , तकनीक ने न केवल अनेक चुनौतियों का समाधान दिया है बल्कि शिक्षक व विद्यार्थी दोनों के रचनात्मकता को विस्तृत आकाश भी दिया है , किंतु क्लास रूम की तर्ज पर ऑनलाइन शिक्षा होने पर क्या संभावनाएँ हैं इन पंक्तियों में देखे ।


ज़ूम , मीट के साथ ही गेम हो रहे ऑन ,
लेक्चर जब बोरिंग लगे ले लो खुद विराम ।


विद्यार्थियों को ऑनलाइन से भी बेहतर अध्ययन अभिगम हो इसके लिए नवाचारों व इक्कीसवी सदी के नये कौशलों को ऑनलाइन शिक्षा का अनिवार्य भाग बनाना ही होगा , 4-Cs या चार "स " कह लें जो है सृजनशीलता , समस्या समाधान , संप्रेषण व सहयोग के तत्व को अंगीकृत व शिक्षा जगत का आधार बनाने के लिए दृढ़ संकल्प लेना होगा । शिक्षा ऑनलाइन हो या ऑफलाइन जब उपर्युक्त तत्त्व उसमें विद्यमान होगा तो प्रतिफल घातक नहीं सदैव लाभदायक ही होगा।
एक ओर जहाँ ऑनलाइन शिक्षा की चुनौतियाँ है तो कहीं ऑनलाइन के लिए ही अनेक चुनौती है जैसे डिवाइस की कमी , इंटरनेट का अभाव , शिक्षा के लिए पर्याप्त अनुकूल वातावरण जिसमें शिक्षक व विद्यार्थी के बीच शाब्दिक आंतरक्रिया हो। पर्वतों के उच्च शिखर जैसे पर्वतारोहियों के दृढ़ संकल्प को मजबूत बनाते हैं वैसे ही चुनौतियों ने तकनीक , शिक्षार्थी व शिक्षकों के शिक्षा के दृढ़ संकल्प को मजबूत किया है , गूगल का ' बोलो एप ' जो #Read along के रूप में लगभग पूरी दुनिया में काम कर रहा है इस बात को चरितार्थ कर रहा है।
ऑनलाइन पढ़ाई कितनी जरूरी?
कर पाती है न्याय या जरूरत पूरी ?
इन सवालों से ज्यादा जरूरी इक सवाल !
कहीं गुम तो नहीं बचपन व किलकारी !
सुमन शर्मा
मुंबई (महाराष्ट्र)

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