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* * @package ThemeGrill * @subpackage ColorMag * @since ColorMag 1.0 */ // Exit if accessed directly. if ( ! defined( 'ABSPATH' ) ) { exit; } ?> नूतन साल की हार्दिक शुभकामनायें-सृष्टि सराफ सिसोदिया - सरल संवाद

नूतन साल की हार्दिक शुभकामनायें-सृष्टि सराफ सिसोदिया

मेरी जिन्दगी, क्या वाकई
नया साल, जन्मदिवस
मेरा घर, मेरे कपड़े, मेरा मेरा मेरा इसे दोहरा कर कर हम अपने आप को ये दिलासा देते है कि सब मेरा है

जन्म मरण की गति मे
जिंदगी सबसे पराई
एक शरीर हासिल कर आत्मा उसमे समाई

एक आता, एक जाता
जिंदगी को किराये की सांसो से जी जाता
जिंदगी के इस जंगल में इस दंगल की हाथा पाई
जिस माँ की बच्चे मे जान समाई
उसकी जान निकले तो समय भी ना कमाई
हम खुद कसाई अपनी जिंदगी के पालो के
जीते जीते हर लम्हे को खुद ही मारते, खत्म करते
जिंदगी का आशियाना किराये का घर

कितना झूठ, फरेब खुदी से करते
उधार की जिंदगी से इतराते
मेरे घरवाले मेरे घरवाले
वही आखिर में आग लगाते
दो दिन नहीं लगते भूल जाने को
बंजारे से फिरते यहां वहां
अपने अस्तित्व को तलाशते
पता नहीं किस अस्तित्व को
जिसे कभी जाना नहीं
उस अनंत शक्ति पर भरोसा दिखाते
और उसे भी हराने के प्रपंच करते

आदि से अन्त तक के विकास में
प्रकृति का दोहन करने आया
जैसे अपना ही अवमूल्यन करने आया
झूठ के दिखावे सपने बड़े बड़े
उनको तोड़ मरोड़ कर क्या हश्र किया
अपना मूल्य बढ़ाने में
संतानो को विरासत देने की भूख में
उनके बच्चों का जीना मुश्किल किया

क्या हमने महसूस किया
साल कैलेंडर में बदलेंगे
बदलाव हमारे बदलाव से ही उपजता
बदलाव ही हमारे विकास की सीडी

नहीं तो सच मे, मेरा यहां कुछ नहीं
मेरा जब हो हमारा
यथासम्भव…………………….
हर दिन नूतन …पवित्र, अमर, सुखमय…………
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