” युवा- स्व अवधारणा के निर्माण का चरण”-डॉ.कुलदीप पाटीदार


“खुद वो बदलाव बनिए ,
जो दुनिया आप में देखना चाहती है”
युवा अवस्था यानी एक ऐसा समय जब हम अपने स्वयं के विचारों को स्थापित करने की ओर अग्रसर होते हैं, एक ऐसा समय जब हमारा लिया गया हर एक निर्णय हमें सही लगता है ,हम हर उस कार्य में कमी निकालते हैं जो दूसरों के द्वारा किया गया हो .
मेरा ऐसा मानना है कि युवा अवस्था एक ऐसी उम्र है जिसमें व्यक्ति अपने शारीरिक ,मानसिक ,सामाजिक विकास के उच्च स्तर पर होता है कुछ इसमें सवर जाते हैं तो कुछ इसमें बिखर जाते हैं.
युवा अवस्था को सफल बनाने के पीछे जितना समर्पण हमारा होता है उतना ही समर्पण हमारे आसपास के लोगों का .
इस समय में परिवार दोस्तों का साथ बहुत अनिवार्य होता है कोई भी इंसान अपने जीवन को सुख में ही बनाना चाहेगा किंतु कभी-कभी हालात उसका साथ नहीं देते .

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