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* * @package ThemeGrill * @subpackage ColorMag * @since ColorMag 1.0 */ // Exit if accessed directly. if ( ! defined( 'ABSPATH' ) ) { exit; } ?> उचित अधिकार पर उठे आवाज़पर देश पर न आए आँच ।- लेखिका रजनी दवे जी - सरल संवाद

उचित अधिकार पर उठे आवाज़
पर देश पर न आए आँच ।- लेखिका रजनी दवे जी

गणतंत्र दिवस भारतीय
जनता और भारत देश के
लिए सबसे महत्वपूर्ण दिन
होता है । देश के सैनिकों का
जोश और पराक्रम दुगुना
हो जाता है । जब वह अपने
शौर्य द्वारा किए गए देश की
सुरक्षा में सहभागी बनते है ।
गणतंत्र दिवस पर सैनिकों की
परेड और वीरता के कारनामे
दिखाकर और हमें देखकर जितना उत्साह ख़ुशी और उमंग होती है ।
वह अपने आप में निराली होती है ।
किन्तु इस बार एक घटना ने सबको
दुखी ही नही वरन अन्दर तक आहत
किया ।
किसान आंदोलन के चलते सोची विचारी रणनीति के अंतर्गत जो
उपद्रव हुआ या करवाया गया ।
वह निंदनीय ही नही बल्कि सोचनीय
हो गया की क्या हमारे देश के
किसान इतना छोटा और हल्का हो
गया कि अपने ही देश भाई बन्धु
पर इस तरह घात कर सकता है ।
कदापि ये किसान नही जो इतना ओछा और घृणित कार्य करे ।
इनके पीछे निश्चित ही कोई बाहरी तत्व और राजनीतिक दल है
जो लालच देकर किसान को
भ्रमित करते हुए अपना काम निकलवाकर किसानो को
आरूढ़ सत्ता के ख़िलाफ़ भड़काऊ
उपद्रव करते हुए सरकार की कार्य प्रणाली को नाकाम करने की साज़िश
किसानो द्वारा या उनके प्रदर्शन की आड़ में अपनी मंशा पूरी करना चाहती है ।
लेकिन ये भारत देश है । इसकी एकता अखण्ड है। जो इस तरह के
उपद्रवों से टूट नही सकती । न हमारे देश के सच्चे नागरिक इस देश पर
कोई आँच आने देंगे ।

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रजनी दवे
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