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* * @package ThemeGrill * @subpackage ColorMag * @since ColorMag 1.0 */ // Exit if accessed directly. if ( ! defined( 'ABSPATH' ) ) { exit; } ?> स्कूल की हो या कॉलेज की इस समय पर  रिस्ट इश्यूज  काफी देखने को मिलता है-डॉ प्रियंका तिवारी - सरल संवाद

स्कूल की हो या कॉलेज की इस समय पर  रिस्ट इश्यूज  काफी देखने को मिलता है-डॉ प्रियंका तिवारी

रिस्ट इश्यूज विषय पर फ़िज़ियोथेरेपिस्ट डॉ प्रियंका तिवारी ने चर्चा की
इंदौर
बच्चों की परीक्षाएं नजदीक है चाहे वे स्कूल की हो या कॉलेज की इस समय पर  रिस्ट इश्यूज  काफी देखने को मिलता है इसी में मद्देनज़र “ रिस्ट इश्यूज ” विषय  पर क्रिएट स्टोरीज सोशल वेलफेयर सोसाइटी द्वारा अवेयरनेस कार्यक्रम कराया गया एवं इस ऑनलाइन सेमिनार में फ़िज़ियोथेरेपिस्ट डॉ प्रियंका तिवारी ने चर्चा की ।
फ़िज़ियोथेरेपिस्ट डॉ प्रियंका तिवारी ने बताया की बच्चो की काफी एक्टिविटीज हम इग्नोर कर जाते है क्यूंकि लॉकडाउन के दौरान और उसके बाद भी बच्चो को न्यू नार्मल लाइफ अडॉप्ट करनी पड़ी है जो कंप्यूटर , लैपटॉप , मोबाइल आदि गैजेट्स में सिमटने लगीं है एवं उनकी फिजिकल एक्टिविटीज और जॉइंट्स मूवमेंट्स ना के बराबर हो गया ,  वे या तो सारा समय कैमरे में देख रहे है या कीबोर्ड या मोबाइल पर थंब चला रहे है जिससे उनकी पोजीशन कांस्टेंट हो गयी जिससे धीरे धीरे ये उनकी आदत बन गयी और आदत बनने से अब काफी दिक्कतें आने लगी है एवं अब जब स्कूल वापस खुलेंगे एवं उनकी परीक्षा आएगी जिसमें उन्हें अब पेन पेंसिल उठाना पड़ेगा तो वापस उन्हें न्यू नार्मल लाइफ जैसा ही फील होगा जिससे रिस्ट इश्यूज काफी होंगे ।
हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार 63 परसेंट लोगों में रिस्ट इश्यूज की समस्याएँ पोस्ट लॉकडाउन देखने को मिल रही है एवं इन सारी समस्यओं की एक ही जड़ है की एक ही पोजीशन में रिपीटेटिव रिस्ट मोशन उदाहरण के लिए टाइपिंग करते है तो एक ही पोजीशन में टाइपिंग करते रहना या फ़ोन चला रहे है तो घंटो वही चलाते रहना इसलिए जब भी थकने की नौबत आती है तो तुरंत कुछ मिनटों का ब्रेक लेना चाहिए ताकि जॉइंट्स या मसल्स रीएक्टिव या रीस्टार्ट हो पायें ।
एग्जाम की बात करें तो एग्जाम से पहले राइटर्स क्रैम्प से हमे बचना चाहिए ,  इससे हमारी लिखने की स्पीड पर असर पड़ता है और हम घबरा जाते है । जिस समय पर परीक्षा होनी है उदाहरण मान लें की दोपहर 12 से 3 तो उस समय लिखने की भरपूर प्रैक्टिस करिए ताकि उस समय को लिखने के हमारी बॉडी उसे अडॉप्ट कर लें और अभी परीक्षाओं में 20 से 25 दिन का समय है तो आसानी से प्रैक्टिस हो सकती है और लिख लिख के पढने ये याद भी जल्दी होता है एवं ब्रेन मेमोरी आटोमेटिक वर्क करती है वैसे सवाल देखकर ।  साथ ही जिस समय परीक्षा होनी है उस समय अगर आपके रेस्ट या सोने का टाइम है तो उसको बदलिए क्यूंकि उस वक्त सोने की आदत आपकी बायोलॉजिकल क्लॉक सेट कर देगी और फिर इसी वक्त एग्जाम में भी आलस आएगा जिससे असर आपकी लिखने की स्पीड और प्रेजेंस ऑफ़ माइंड पर भी पड़ेगा ।
एक रिसर्चर ने कहाँ है “ मूवमेंट इस द अल्टीमेट एक्सरसाइज फॉर बॉडी ” , मूवमेंट यानी जो भी जॉइंट जितना मूव हो रहा हो , उदहारण के लिए अपनी एक ऊँगली ले वो पीछे आगे दायें बाएं जाएगी और डिजिटल मूवमेंट्स होंगे इसमें ऊँगली के जॉइंट्स मूव हो रहे है और यही जब हम पूरे शरीर के लिए करते है तो वो एक कम्पलीट एक्सरसाइज होती है । वर्कआउट या फिजिकल फिटनेस का मतलब शरीर को मूव करना नही है बल्कि मतलब तब है जब आपके जॉइंट्स मूव हो रहे हों । दिन भर में कम से कम 45 मिनट अपने शरीर को ज़रूर दें ।
राइटर्स क्रैम्प की बात करें तो 50 परसेंट से ज्यदा बच्चो में एक आम समस्या देखने को मिलती है जो की है राइटर्स क्रैम्प यानि लिखने में अंगुलियों में समस्या यह आजकल यह परीक्षा के दौरान या बाद में होती है क्यूंकि ज्यदातर बच्चे एक साथ तभी लिखते है  । इसके कारण जैसे कलम को ठीक से न पकड़ पाना , लिखने में समस्या , लिखने की गति धीमी हो जाना , लिखावट साफ़ न होना , हथेली व हाथ में दर्द होना , लिखावट में बदलाव या ठीक न होना , पहले जैसे लिखावट के तरीके में बदलाव , लिखे गए अक्षर या शब्द पढ़ने या समझने में परेशानी ।
फ़िज़ियोथेरेपिस्ट डॉ प्रियंका तिवारी ने बताया इसका मुख्य कारण है उँगलियों को लगातार चलने की प्रैक्टिस न होना । एग्जाम के पहले लिख लिख कर पढ़िए,  एक बार में 5 से 10 पेज लिखने की प्रैक्टिस करिए , लिखते लिखते वह हमारी आदत बनेगी साथ ही हमारे दिमाग को भी वह समझ आने लगेगा एवं परीक्षा में जब हम वह सवाल देखेंगे तो हमारी उंगलिया अपने आप चलेंगी क्यूंकि हमने प्रैक्टिस करी है लिखने की । रोजाना लिखने की आदत रह्र्गी तो 3 घंटे की एग्जाम आसानी से बिना उँगलियों और मांशपेशियों के दर्द के निकलेगा एवं स्पीड कम नही होगी , इसलिए लिखने को पढने के साथ साथ आदत बनाइये   ।
कार्पल टनल सिंड्रोम में कंप्यूटर या लैपटॉप पर लंबे समय तक काम करने के कारण कई बार आपकी हाथों में सुन्न और कलाई में दर्द जैसी समस्याएं महसूस होती हैं । यह समस्या एक आम बीमारी का रूप ले चुकी है । दूसरी बीमारियों की तरह कार्पल टनल सिंड्रोम के भी कुछ लक्षण होते हैं जिनकी मदद से आपको इस बात का अंदाजा लग सकता है की आप इस बीमारी से पीड़ित हैं । यह बीमारी सबसे पहले इंडेक्स या मध्यम (मिडिल) फिंगर को प्रभावित करता है। जिसके कारण आपको इन उंगलियों में जलन महसूस हो सकती है । धीरे धीरे यह समस्या जलन से दर्द में बदलने लगती है और फिर यह दर्द उंगलियों से कलाई और कंधों तक पहुंच जाता है । अगर यह दिक्कत आ रही है तो स्ट्रेचिंग करें और आठ मिनट बर्फ का सेक करें ज्यदा तकलीफ होने पर तुरंत एक्सपर्ट को दिखाएँ ।

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