भगवान श्री राम ने अपने जीवन में सभी से समान और सम्यक व्यवहार रखा।-लकी आदिवाल

सरल संवाद।ऊंच नीच की भावन से बचो : प्रभु श्रीराम ने अपने जीवन से यह बताया और सिखाया कि संसार में कोई छोटा या कोई बड़ा नहीं होता। कोई उच्च वर्ग का या कोई निम्न वर्ग का नहीं होता है। प्रभु श्रीराम वन में वनवासियों और आदिवासियों की तरह ही रहे। उनका केवट, जटायु, संपाती, शबरी, वानर, ‍रीछ आदि कई जनजातियों ने साथ दिया। वे कई ऋषि मुनियों के आश्रम के साथ ही आदिवासियों की झोपड़ी में भी रहे थे। सिर्फ राम ही नहीं संपूर्ण रामायण में हर पात्र ऊंच और नीच के विचारों से मुक्त है।

भगवान श्री राम ने अपने जीवन में सभी से समान और सम्यक व्यवहार रखा। न किसी को राजा समझा और न रंक। न शक्तिशाली समझा और न कमजोर। उन्होंने पशु और पक्षियों के साथ भी वैसा ही व्यवहार किया जैसे कि एक मनुष्य के साथ किया जाता है। उनका विनम्र आचरण और अपने से बड़ों और छोटों सबको सम्मान देना हम सबको एक सीख देता है।
लक्की आदिवाल महानगर मंत्री अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इंदौर महानगर

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