महामारी का तांडव: ख़ुशमिज़ाज होना ही बेहतर इलाज- डॉ. पुनीत द्विवेदी

ख़ुश रहने से स्ट्रेस लेवल कम होता है और आक्सीजन की मात्रा बढ़ती है।

म्यूज़िक सुनना, मंत्रोच्चार करने से भी स्ट्रेस लेवल कम किया जा सकता है।

नकारात्मक खबरों एवं अफ़वाहों से दूरी बनायें।

स्वयं को व्यस्त रखने के लिये पुस्तकें पढ़ें, गीत, कविता कहानी लिखें, पेंटिंग करें।कोविड के लिये सुझाई गई दवाओं का सेवन करते रहें।

अक्सर देखा गया है कि बीमारी होते ही पेशेंट के साथ परिवार के सभी लोग पैनिक हो जाते हैं। पैनिक होने से भय का वातावरण बनता है। भय के वातावरण से शरीर का श्वसन तंत्र प्रभावित होता है एवं शरीर में आक्सीजन की कमी होने लगती है। दूसरी तरफ़ ख़ुशमिज़ाज व्यक्ति का ऑक्सीजन लेवल शरीर की आवश्यकता के अनुकूल रहता है।

परिवार के एक व्यक्ति के संक्रमित होने और बाक़ी परिवार जनों के अंदर बढ़ते भय के कारण उनके भी संक्रमित होने की संभावना बढ़ जाती है। हमें यह ध्यान रखना है कि कोरोना वायरस का संक्रमण अलग-अलग शरीरों पर अलग-अलग प्रकार से प्रभाव दिखा रहा है। कोई आवश्यक नहीं कि सबको हॉस्पीटल में एडमिट करना ही पड़े। यह भी देखा गया है कि बहुत सारे संक्रमित मरीज़ घर पर भी आईसोलेट होकर ठीक हो गये हैं। ख़ासकर चिंता उन संक्रमित मरीज़ों के लिये अधिक है जो अन्य किसी गंभीर बीमारी जैसे कैंसर, किडनी की समस्या, फेंफडे की समस्या, डायबिटीज़, हृदय रोग आदि से ग्रसित हैं। परंतु, यह देखा गया है कि ऐसे भी बहुत सारे मरीज़ स्वस्थ होकर घर जा रहे हैं।

संक्रमण के बाद होम आईसोलेशन में कई ऐसी होम रेमिडी भी हैं जिनके माध्यम से संक्रमण पर विजय प्राप्त किया जा सकता है। जैसे दिन में तीन से पाँच बार गर्म पानी में अज्वाईन डालकर भाप लेना जिससे कि फेंफडे में बलगम डायल्यूट होता रहे और कफ से जकड़न ना हो; जिससे सॉस लेने में दिक़्क़त ना हो। गर्म पानी से गारगिल (कुल्ली) करते समय पानी में हल्दी मिलाने से लाभ होगा। नाक में अणु तैल या सरसों का तेल डालें। ऑक्सीजन की समस्या लगने पर पेट के बल लेटें। योग-प्राणायाम से भी ऑक्सीजन का लेवेल आसानी से बढ़ाया जा सकता है और इससे रोक प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। यह ध्यान रहे कि साथ ही साथ शासन द्वारा दिये गये अन्य बचाव हित सुझाओं का ध्यान रखते हुये, सुझाई गई दवाओं का नित्य समय पर सेवन करें। भोजन भर पेट करें। भोजन में फल-सब्ज़ियॉ, दूध आदि का समुचित सेवन करें।

शोध में देखा गया है कि ख़ुशमिज़ाज व्यक्ति का आत्मबल बढ़ा रहता है और वह आसानी से किसी रोग पर विजय प्राप्त कर लेता है। अत: आइसोलेशन में भी ख़ुशमिज़ाज रहें। अच्छा साहित्य, पुस्तकें पढ़ें। पेंटिंग इत्यादि में यदि अभिरुचि है तो पेंटिंग्स बनायें। संगीत सुनें । कहा जाता है कि संगीत में भी रोग को हीलिंग करने की क्षमता होती है। इससे मन ठीक और मन ठीक तो बीमारी ठीक हो जाती है। यह ध्यान रहे कि प्रत्येक संक्रमण का एक समय काल होता है उसके पश्चात उसका प्रभाव क्रमश: कम होता जाता है। हमें उस समय की प्रतीक्षा करते हुये सभी मेडिकल प्रिसक्रिप्शन्स लेते रहना है।

हमारा आत्मविश्वास हमें बीमारी पर जीत प्रदान करता है। एवं हमारी ख़ुशमिज़ाजी के कारण हमारे साथ-साथ हमारे परिवार जन एवं अन्य पीड़ित मरीज़ों का भी आत्मविश्वास बढ़ता है और वो भी शीघ्र रीकवर होने लगते हैं। नकारात्मक विचारों एवं समाचारों को स्वयं से दूर रखें। यह आपको मानसिक रूप कमजोर करते हैं जिससे प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है। सनातन धर्म में मंत्रोच्चार से आत्मशुद्धि एवं आत्मविश्वास बढ़ाने के उद्धरण भी देखने को मिलते हैं। अत: उपयुक्त मंत्रों के उच्चारण से भी श्वसन तंत्र को मज़बूत किया जा सकता है।

कुल मिलाकर आपको सकारात्मक रहना है। सकारात्मकता ही विजय है। स्वयं को ख़ुश रखकर हम अपने और अपने परिजनों का आत्मविश्वास बढ़ा सकते हैं और इस महामारी पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। अत: ख़ुश रहें। स्वस्थ रहें। मस्त रहें।

(लेखक डॉ. पुनीत कुमार द्विवेदी मॉडर्न ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूट्स, इंदौर में प्रोफ़ेसर एवं समूह निदेशक की भूमिका में कार्यरत हैं।)

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