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राजपरिवार में जन्म लेने के बाद भी उन्होंने अहिंसा व्रत धारण किया है-ममता जैन

सरल संवाद।हर वर्ष चैत्र माह की तेरस को हम भगवान महावीर का जन्म उत्सव महावीर जयंती के रूप में मनाते हैं। भव्य आयोजन किए जाते हैं, एक दूसरे को बधाई देते हैं ,भगवान को पालना झूलाते हैं ,घर-घर मंगलाचरण होते हैं,। इस दिन प्रभात फेरी, कलश, विशेष पूजा मंदिरों में आयोजित की जाती है ।शाम को घरों में दीपावली जैसी रोशनी होती है और मंगल आरती की जाती है। लेकिन इस बार फिर से मंदिर बंद है सभी साथ नहीं हो सकते, इसीलिए फिर से सभी आयोजन पूरे विश्व की जैन समाज ने निरस्त कर दिए हैं ।जो कि महावीर के सिद्धांतों के अनुसार एक दूसरे की सुरक्षा के लिए आवश्यक भी हैं। यह तो परिस्थिति वर्ष हुआ लेकिन आज के दौर में महावीर के सिद्धांत कितने प्रासंगिक है हम चिंतन मनन तो कर ही सकते हैं।
कुंडलपुर के राजपरिवार में जन्म लेने के बाद मात्र 30 वर्ष की आयु में घर छोड़कर तप करने निकल पड़े थे वर्धमान महावीर। इस आयु में आज के युवा सांसारिक विषयों में लिप्त रहते हैं, भला बुरा तो ठीक खुद की भी सही पहचान नहीं बना पाते। 12 वर्ष की कठिन तपस्या के बाद संसार को अपने ज्ञान से लाभान्वित करने निकल पड़े थे, महावीर ।

जियो और जीने दो
अहिंसा परमो धर्म
परस्परोगृहो जीवानाम
जैसे महान सिद्धांत संसार को दिए महावीर स्वामी ने।
इन सिद्धांतों के अनुसार हमें खुद भी अनुशासित और संयमित जीवन जीना चाहिए। प्रकृति, जीव, मनुष्य समाज सभी के लिए अनुकूल परिस्थितियां निर्मित करनी चाहिए। एक दूसरे के सहायक बने विरोधी बन कर मात्र लड़ाई की जा सकती है, और शांति बनाए रखने के लिए सहयोग और समभाव अत्यंत आवश्यक है।
शाकाहारी जीवनशैली अपनाकर हम हर रोग का निवारण आसानी से कर सकते हैं। और प्रकृति ने हमें यह व्यवस्था सुचारू रूप से प्रदान की है, लेकिन हमने उसका सिर्फ दोहन किया है। हमें प्रयास करना होगा कि हम प्रकृति प्राणी और मनुष्य समाज से जो ले रहे हैं, उसे लौटाते भी चलें। हर कार्य की अति घातक होती है अतः हम आवश्यकता के अनुसार ही प्रकृति का दोहन करें ।
अहिंसा के मार्ग पर चलकर धर्म का पालन करना चाहिए ।हर समस्या का हल अहिंसा से हो सकता है स्वयं राजपरिवार में जन्म लेने के बाद भी उन्होंने अहिंसा व्रत धारण किया है इसी का परिणाम रहा कि उनके काल में शेर और बकरी एक ही घाट पर पानी पिया करते थे किसी के भी दुख का कारण नहीं बनना बल्कि दुख का निवारण करना चाहिए। किसी को भी थोड़ा सा भी दुख पहुंचे ऐसा कोई काम ना करें ।प्रकृति ने भारत की भूमि को अनेक विशाल जीवन उपयोगी भंडार दिए हैं आने वाली पीढ़ी को उन की प्राप्ति हो यह सुनिश्चित करना हमारा कर्तव्य है।
काम, क्रोध, मद, लोभ, लालच को छोड़कर अनुशासित और शांतिपूर्ण जीवन जीने का महावीर स्वामी ने हमें संदेश दिया है ।
आज के माहौल में विश्व कारोना से जूझ रहा है। महावीर के सिद्धांतों पर चलकर ही इस विषम परिस्थिति में विश्व शांति को प्राप्त किया जा सकता है।जैनियों की जीवन शैली अत्यंत संयमित और वैज्ञानिक है। गर्म पानी, शाकाहार, समय अनुसार ही भोजन ग्रहण करना ,सूर्योदय के साथ गर्म किया गया पानी, और सूर्यास्त से पूर्व किया गया भोजन वह भी शाकाहार हमारे शरीर को इम्यूनिटी की कमी या अन्य रोगो से बचाता है।
वर्तमान परिस्थितियों में हमें सम्यक दर्शन, ज्ञान और चरित्र का निर्माण करते हुए घरों को ही मंदिर मानकर महावीर जयंती मनानी चाहिए।
महावीर का आह्वान करें, प्रभु की जयंती पर दीपमाला अवश्य करें।
निरोगी, अहिंसामयी विश्व शांति की कामना के साथ सभी को महावीर जयंती की अनेकानेक बधाइयां।🙏🏻

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