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* * @package ThemeGrill * @subpackage ColorMag * @since ColorMag 1.0 */ // Exit if accessed directly. if ( ! defined( 'ABSPATH' ) ) { exit; } ?> "दोषी कौन?"- कविअमित चौहान - सरल संवाद

“दोषी कौन?”- कविअमित चौहान

सरल संवाद।326 ईसा पूर्व में यूनान का एक लुटेरा “विश्व विजेता” बनने का स्वप्न लेकर भारत की देहरी पर आकर खड़ा हो गया था। उस समय भारत 16 महाजनपदों में विभाजित था। इन महाजनपदों के बीच सीमा विवाद आदि विषयो पर अक्सर युद्ध छिड़ जाया करते थे। परिणामस्वरूप जिन महाजनपदों की स्थापना राष्ट्र की शासन व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए की गई थी वे ही आपसी मतभेदों में उलझे हुए थे ।

भारत की उत्तरी सीमा गन्धार ( आज के अफ़ग़ानिस्तान ) तक थी गन्धार के राजा आंभीराज के पुत्र आंभी कुमार ने विद्रोह किया और अपने पिता को राजसिंहासन से हटा स्वयं का शासन आरम्भ किया। आंभी कुमार एक अयोग्य शासक सिद्ध हुआ आंभी ने उस यूनानी लुटेरे अलक्षेन्द्र ( “सिकन्दर”/ “अलेक्जांडर” ) की सहायता की और उसके लिए भारत की सीमाओं के द्वार खोल दिए। जनपदों के आंतरिक मतभेदों का लाभ अलक्षेन्द्र को हुआ और उसने सिंधु घाटी पर अपना अधिपत्य स्थापित कर लिया। हम आपसी मतभेदों में उलझे रहे , एक दूसरे पर दोषारोपण करते रहे और एक विदेशी लुटेरा हमारे मतभेदों का लाभ उठाकर हमारे ऊपर शासन करने लगा। जनपदो की राजनीति पर राष्ट्रीयता की बलि चढ़ गयी। असंख्य निर्दोष जनता का शोणित बहा, अनेको सैनिक बलिदान हुए। दोषी कौन?

भारत की ये पावन भूमि इस घटना की साक्ष्य है कि जब उत्तरपद की जनता ने यवन सत्ता को चुनौती दी विद्रोह किया तब अलक्षेन्द्र को घुटने टेकने पड़े। भारत की सामान्य जनता ने यवनों को विरुध्द शस्त्र उठाए तब यवन सत्ता पराजित हुई।

भारत के इतिहास में ऐसा मुग़लो के आक्रमण के समय, अंग्रेजों के आक्रमण के समय भी हुआ किंतु हमने इससे कभी सीख नही ली। हम आज भी चुनौतीयो का ,आपदाओं का सामना नही करते किंतु जब कोई राष्ट्रीय आपदा आती हैं तो हम सरकार, शासन, प्रशासन को इसका आरोपी बताकर अपना पल्ला झाड़ लेते है।

वर्तमान में भी यही हो रहा है, कोरोना की समस्या देश के लिए बहुत कड़ी चुनौतीया लेकर आयी है। चारो ओर त्राहिमाम त्राहिमाम मचा हुआ है, किंतु हम क्या कर रहे है ? केवल दोषारोपण, सरकार पर दोषारोपण,प्रशासन पर दोषारोपण,डॉक्टरो पर दोषारोपण कर केवल अपना पल्ला झाड़ रहे है । और कुछ महानुभाव तो कोरोना जैसी कोई बीमारी है इसे भी अस्वीकार कर रहे है, धन्य है ….।

हम सरकार को , प्रशासन को तो दोषी ठहरा रहे है कि सरकार ने अस्पतालों में ऑक्सिजन का, दवाइयों का प्रबन्ध नही किया किंतु मैं आपसे पूछता हूँ , जब आज से 3-4 माह पूर्व यूरोप और ब्राज़ील में कोरोना का नया स्ट्रेन मिला था तब क्या आप कोविड नियमो का पालन कर रहे थे? क्या आप मास्क पहन रहे थे? क्या आप भीड़भाड़ वाली जगहों में जाने से बच रहे थे? “नही जी! हम तो तब भी कोविड के नियमो का पालन कर रहे थे” यदि कर रहे थे तो दूसरी लहर कैसे आई? ” फला फला व्यक्ति ने ऐसा किया इसलिए , सरकार ने ऐसा ऐसा किया इसलिए , प्रशासन जिम्मेदार है जी” यही जवाब होगा? “हमने नियमो का पालन नही किया” ऐसा कोई नही कहेगा हमने कोविड के नियम अपनी मौज मस्ती के लिए स्वाहा कर दिए इस कारण आज ये परिस्थिति खड़ी हुई है।
और इस परिस्थिति से निपटना भी हमे ही है, सरकार कितने ही प्रयास कर ले किंतु जब तक हम जागरूक नही होंगे कोई प्रयास सार्थक नही है।

क्या कारण था कि भारत की जनता ने यवन सत्ता के विरुद्ध विद्रोह किया ? कारण थी जागरूकता। “जब जनता जागरूक होती है तो बड़े बड़े शासकों के राजसिंहासन पलट जाते है ” यह बात जनता और शासक दोनों को स्मरण होनी चाहिए।
किंतु आज हमे कोई शस्त्र उठाने की कोई आंदोलन करने की आवश्यकता नही है ऐसा करने से तो परिस्थिति और बिगड़ेगी। देश अपना, लोकतांत्रिक रूप से चुनी गयी सरकार अपनी, तो विद्रोह का तो कोई सवाल ही नही उठता।

तो क्या किया जाए? इस समस्या का निराकरण कैसे होगा? क्या किया जाये? सबसे पहले तो अपने आप को अवसाद से बचाए , कोरोना से ज्यादा घातक है अवसाद ,सोशियल मीडिया पर चल रहे नकारात्मक संदेशों से दूर रहे। दूसरा कोविड नियमो का पालन करे मास्क व सैनिटाइजर का प्रयोग करें, लोकडाउन का पालन करे, भीड़ भाड़ वाली जगह पर जाने से बचे। तीसरा यदि आपकी आयु 45 वर्ष से अधिक है और अभी तक आपने टीकाकरण नही करवाया तो अपना कोविड टीकाकरण कराए और दूसरे लोगो को भी प्रेरित करे।
चौथा अपने आसपास, सगे-सम्बन्धियों , में यदि कोई कोरोना पोसिटिव है तो अपनी सुरक्षा का ध्यान रखते हुए उनकी सहायता करें। पांचवा किसी भी व्हाट्सअप मैसेज या फेसबुक पोस्ट को पढ़कर अपना इलाज करने का प्रयास न करे यदि आपको कोविड के लक्षण है तो अपना कोविड टेस्ट कराए और डॉक्टर से परामर्श ले। और सबसे महत्वपूर्ण यदि आप कोरोना से ठीक हो चुके है तो अपना प्लाज्मा दान करें आप किसी का जीवन बचा सकते है।

आप इन सभी बातों का अनुसरण करे यही कोविड के विरुद्ध राष्ट्र की विजय में आपका अमूल्य योगदान होगा । जीतेगा भारत हारेगा कोरोना।

वन्दे मातरम

लेखक -: कवि अमित नरेश चौहान
पता -: 224 , श्री विनायक टाऊनशिप , देवगुराड़िया , इंदौर
मो-: 9340687055

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