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* * @package ThemeGrill * @subpackage ColorMag * @since ColorMag 1.0 */ // Exit if accessed directly. if ( ! defined( 'ABSPATH' ) ) { exit; } ?> ये कालाबाजारी की लाचार बस्ती हैजिंदगी महंगी और यहॉ मौत सस्ती है - सरल संवाद

ये कालाबाजारी की लाचार बस्ती है
जिंदगी महंगी और यहॉ मौत सस्ती है

सरल संवाद।पहले रेमडीशिविर फिर ऑक्सीजन फिर एम्बुलेंस और अब ऑक्सीजन लेवल दिखाने वाली ऑक्सीमीटर तक काला बाजार दमक रहा है , चमक रहा है अंधेरा तो बस हैरान जिंदगी में है जो आज फना है, उस अंधेरे को देखने के लिए ईमान की आंखे चाहिए जो अब नही रही। आज जब कांग्रेसी नेता जब इंदौर में कालाबाजारी करते पकड़े गए तो यकीन हो गया कि अवसरवाद छोटे बिचौलियों की जागीर नही बल्कि तासीर है “जिसे मिला मौका उसने दिया धोखा” इंदौर हो या दिल्ली सब जगह रेमडीशिविर के इंजेक्शन मरीज को महंगे मिले। 1500 का इंजेक्शन 50 गुना तक बिक गया साथ में बेचने वालों का ज़मीर भी। सियासती लोग जो “नेता” थे उन्हें तो ये करिश्मा नही करना था। शहर और इंसानियत दोनो बदनाम हुए एक साथ ।

लाचारी में कालाबाजारी : आज जहां लोग सेवा में तन मन धन और जान की बाजी लगाकर काम कर रहे है तब तो ये छोड़ देना चाहिए। अस्पताल मै कोहराम है मौत का सन्नाटा है मगर कालाबाजारी शबाब पर है। नीला पानी भी अलग अलग भाव में बिक रहा है किसे पता कौन सा मानक सही या नही । कुल मिलाकर मौत के बड़े और बढ़े प्रतिशत के हिस्सेदार वो लोग भी है जिन्होंने कोरोना काल में बाजार को रोशन किया। अब कानून अपना काम करेगा लेकिन तब तक मौत के सौदागर अपना काम कर चुके है। इंसानियत फिर शर्मिंदा है।

काला बाजारी की कला सदियों से है , कभी अनाज , कभी सब्जी , कभी साजो सामान। इस बार मौत का इंतजाम कर दिया है दलालों ने । इंसानियत कराह रही है काश हम सजग हो पाते ।

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