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* * @package ThemeGrill * @subpackage ColorMag * @since ColorMag 1.0 */ // Exit if accessed directly. if ( ! defined( 'ABSPATH' ) ) { exit; } ?> नारदजी त्रिलोकीज्ञातात्रिलोकी संवाददाता- गगन चौकसे - सरल संवाद

नारदजी त्रिलोकीज्ञाता
त्रिलोकी संवाददाता- गगन चौकसे

सरल संवाद।विडम्बना है कि भगवान नारद सृष्टि रचियता ब्रम्हाजी के पुत्र देवऋषि भगवान नारद की महिमा से अज्ञानी आज भी अनभिज्ञ है। सही मायने में तो वो सृष्टि और सृष्टि पालक भगवान विष्णु के बीच की कड़ी है। अनेक प्रसंगों में साक्ष्य साक्षी है कि कैसे भगवान नारायण के अग्रदूत , परम ज्ञानी तपस्वी त्रिलोकी संवाददाता ने सृष्टि जागरण का कार्य अपने श्रीमुख के संवाद से किया। भगवान नारद ने सृजन , समन्वय और चेतन्य की परिभाषा अपने जीवन चरित्र से लिखी। जब भी पृथ्वीलोक पर संकट होता सर्वप्रथम भगवान नारद घटित स्थल पर वायुवेग से पहुँचकर प्रगट होते और फिर वो उस जीव की पीड़ा को प्रभु तक अपने संवाद से पहुँचाते जिससे विश्व का कल्याण हो सके। उनका किरदार एक मैसेंजर मात्र नही था बल्कि समन्वय का भी था। उत्थान के लिए भी था और कल्याण का भी था।

भगवान नारद जी ने संवाद को कल्याण की शक्ति और अभिव्यक्ति का सूत्र बताया । जब भी वो कहते देव भी उन पर भरोसा करते और दानव भी साथ ही मानव भी। भगवान नारद ने मापदंड तय किये की निष्पक्ष “संवाददाता” क्या होता है जो सिर्फ सच और जनकल्याण की बात करता है। देवताओं को भी उनके संदेश का इंतजार होता था। ऐसे देवऋषि अपनी वाणी और वीणा से शब्दघोष कर पृथ्वीलोक की रक्षा करते आये है। उनकी भूमिका पत्रकार जगत के लिए अनुकरणीय है, आदरणीय है वंदनीय है।

हाईलाइट : वामपंथी और भ्रष्ट बॉलीवुड ने प्रभु नारद को मात्र “मैसेंजर” घोषित किया जबकि वो सत्य और सार्थकता के पर्याय है। विडम्बना है कि इस देश में देवताओं का भी अपमान हुआ है। भगवान नारद को पढ़ना चाहिए वो न्यायकर्ता है जो जग पालनकर्ता के सजग सवाद दाता है।

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