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* * @package ThemeGrill * @subpackage ColorMag * @since ColorMag 1.0 */ // Exit if accessed directly. if ( ! defined( 'ABSPATH' ) ) { exit; } ?> आर्युवेद और संस्कृति- विघ्नेश दवे - सरल संवाद

आर्युवेद और संस्कृति- विघ्नेश दवे


हमारी संस्कृति में आयुर्वेद चिकित्सा का अपना अलग एक महत्व हैं । हम चाहते हैं की हमारा देश पुनः विश्व गुरु बने, पर हम अपनी जड़ों को अपनाने से क्यों कराते है ? अभी कुछ दिनों पहले कोई यह पूछ रहा था की गौ मूत्र पीने से क्या होगा ? इसके कोई प्रमाण है ? यज्ञ से क्या होगी ? इसके कोई प्रमाण ? और न जाने कितनी चीजों के प्रमाण मांगे जाते हैं जो आयुर्वेद से हो, ऐसे तो अभी जो टीका आया है वो कितना असरदार है इसका कोई पुख़्ता प्रमाण नहीं है। टीका लगने के बाद भी कई लोगो की मृत्यु हुई है ।
इसका अर्थ यह नहीं मैं टीके की विरोध में हूं, किंतु हर बार आयुर्वेद या सनातन संस्कृति पर ही सवाल क्यों ? आयुर्वेद में और वेदों में यज्ञ चिकित्सा का अलग महत्त्व है l इसके अलावा गौ मूत्र के भी फायदे के बारे में वागभट्ट जी अपने सूत्र दिए है । यज्ञ का सबसे अच्छा फ़ल यह है की वातावरण शुद्ध हो जाता है और गौ मूत्र या हमारे घर के खड़े मसाले के बारे में आपको आयुर्वेद में विस्तृत जानकारी मिलेंगी । कई चिकित्सकों का मानना है की गौ मूत्र केंसर के रोगियों के लिए लाभकारी है यदि उसकी कुछ मात्रा और उसको लेने के नियम माने जाए । मैं यदि मेरी बात करूं मुझे आयुर्वेद से क्या लाभ हुए तो शायद 50 लाख शब्द भी कम पड़ जाए, जब भी मौसम बदलता था मुझे बुखार आता था मुझे 3 वर्ष हुए है आर्युवेद की नियम को अपनाया और अब मौसम बदलता है पर मेरा स्वाथ्य में कोई बदलाव नहीं आता न ही बुखार न ही सर्दी खांसी, इसका मतलब है कि आयुर्वेद काफ़ी कारगर है । यदि हम लोग चाहते हैं की हमारा देश पुनः विश्व गुरु बने तो हमे हमारी संस्कृति और जड़ों को अपनाना होगा ।

विघ्नेश दवे
कर सलाहकार
8827478622

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