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* * @package ThemeGrill * @subpackage ColorMag * @since ColorMag 1.0 */ // Exit if accessed directly. if ( ! defined( 'ABSPATH' ) ) { exit; } ?> प्राण वायु दाता पेड़-प्रत्युन राय - सरल संवाद

प्राण वायु दाता पेड़-प्रत्युन राय

याद आ गई पेड़ो की जब जरूरत पड़ी ऑक्सीजन की।

चंद पैसों के लालच में कर दी पेड़ो की कटाई ।अब कहा से लाओगे ऑक्सीजन , जब दर-दर भटका दिया इसने ।अब याद आ गई पेड़ो की जब जरूरत पड़ी ऑक्सीजन की।

*शहरो के विकास में  अड़चन पड़े ये पेड़ तो काट दिए गए। ये अब देख लो इन मासूमो की कटाई का दिख गया विकराल रूप ,अब याद आ गई पेड़ो की जब जरूरत पड़ी ऑक्सीजन की ।

*खूब करी कटाई इन मासूमो जबकि इनका जन्मो जन्मो तक का नाता है। ये हमे दिन की छाया ,रात्रि में ठंडी हवा और ऑक्सीजन का दाता है  जब भी काट दिए इन पेड़ों को,अब  याद आ गई पेड़ो की जब जरूरत पड़ी ऑक्सीजन की।

*अब भुगत रही सारी जनता , भटक रही दर-दर पर  फिर भी नही हो रही पूर्ति ऑक्सीजन की,अब याद आ गई इन पेड़ों की जब जरूरत पड़ी ऑक्सीजन जान की ।

*अब खुल रहे ज्ञानीयो के ज्ञान , कहा जाता सारा ज्ञान  जब होता है इनका विनाश ,अब याद गई इन पेड़ो की जब जरूरत पड़ी ऑक्सीजन की।

*जिस-जिस ने इनकी रक्षा करी आंच न आने दी इनने ,
और जब-जब इनका विनाश हुआ जब धरा रहा गया सारा ज्ञान ,अब याद आ गई इन पेड़ी की जब जरूरत पड़ी ऑक्सीजन की ।

*पेड़ो की कटाई का यह दिख गया विकराल रूप और जब- जब प्रकृति से हुई छेड़ छाड़ जब दिख गया विकराल रूप ,याद आ गई इन पेड़ों की जब जरूरत पड़ी ऑक्सीजन  की  अब।  
साँसें हो रही है कम  आओ पेड़ लगाएं हम

       पेड़ लगाओ खुशिया मनाओ

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