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क्योंकि यह खून का रिश्ता है-विजय अग्रवाल

क्योंकि यह खून का रिश्ता है

इंसानियत से देखो तो,
वह भी किसी का सगा है..
भाई बहन मां बाप आदि,
कहीं रिश्ते में लगा है ।

सभी को समझना,
बहुत जरूरी है इसको..
पूर्णतः सुरक्षित है,
खून देना किसी को ।

किसी के साथ,
दुर्घटना हो गई हो..
या किसी को कोई,
बीमारी लग गई हो ।

खून की जरूरत,
खून से ही तो पूरी होती है..
समय पर इसकी,
उपलब्धता जरूरी होती है ।

अंजाना सा रहा वो शख्स,
अपना ही बन जाता है..
बे समय के काल से निकलकर,
आयुष्मान हो पाता है ।

देश और हिंदू धर्म,
सम्मानित हो जाता है..
जब पतली सी नली से जुड़कर,
खून का रिश्ता बन जाता है ।

वसुदेव कुटुंबकम तब,
चरितार्थ ही हो पाता है..
जब मिलो दूर से दौड़ कर,
कोई खून देने चला आता है ।

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