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* * @package ThemeGrill * @subpackage ColorMag * @since ColorMag 1.0 */ // Exit if accessed directly. if ( ! defined( 'ABSPATH' ) ) { exit; } ?> आओ धरती का श्रृंगार करें-रक्षा शर्मा "रक्षारचित" - सरल संवाद

आओ धरती का श्रृंगार करें-रक्षा शर्मा “रक्षारचित”

आओ धरती का श्रृंगार करें
सामान्य वर्षा, बिगड़ते मौसम और प्रदूषित वातावरण को संतुलित करने करने के लिए वृक्षों को लगाना समय की मांग है।
परंपरा ,प्रकृति और पर्यावरण का आपस में गहरा संबंध है।
यह संबंध बताते हुए हम कह सकते हैं कि ,हमारी संस्कृति में पेड़ पौधों की पूजा की जाती है ,इसलिए हम पेड़ पौधे लगाने पर जोर देते हैं ,काटने पर नहीं। भारतीय संस्कृति में प्रत्येक ग्रह नक्षत्रों के लिए एक विशिष्ट पेड़ निर्धारित किया गया है । कहीं-कहीं पर उसे नक्षत्र वाटिका के रूप में स्थापित किया गया है ।इसके अतिरिक्त कुछ पेड़ पौधे ऐसे हैं जिनमें वर्ष पर्यंत जल चढ़ाने का विधान बनाया गया है, जिनमें तुलसी प्रमुख पौधा है हमारे यहां सर्वविदित है कि तुलसी का पौधा हर घर में होना चाहिए।
इसके अलावा आयुर्वेद विज्ञान प्राचीन भारत का सबसे महत्वपूर्ण विज्ञान है ।जिसमें शारीरिक व्याधियों से निपटने के लिए पूर्ण रूप से प्रकृति पर निर्भरता दिखाई हुई है। प्राचीन काल में ऋषि मुनि प्रत्येक पौधे के महत्व को समझते थे। उनकी पंचांग का प्रयोग विभिन्न प्रकार की बीमारियों से मुक्ति के लिए जड़ी बूटियों के प्रयोग के माध्यम से उपचार बताए गए हैं ।
पेड़ मनुष्य का परम हितैषी है। प्रकृति की ओर से धरती को दिया गया अनमोल उपहार है पेड़। … पेड़ हमें इमारती लकड़ी, ईंधन, पशुओं के लिए चारा, औषधि, लाख, गोंद, पत्ते आदि देते हैं। हम जो विषैली वायु बाहर छोड़ते हैं, वृक्ष उसे ग्रहण करके स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक वायु हमें प्रदान करते हैं और हमें जीवन देते हैं।
चलो पेड़ –पौधे लगाये, धरती को खुशहाल बनाये.
लेखिका:- रक्षा शर्मा “रक्षारचित”

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