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* * @package ThemeGrill * @subpackage ColorMag * @since ColorMag 1.0 */ // Exit if accessed directly. if ( ! defined( 'ABSPATH' ) ) { exit; } ?> एक समाज सेवी की कलम से - सरल संवाद

एक समाज सेवी की कलम से

बड़ा ही खूबसूरत शब्द है इस शब्द का प्रयोग बहुत जगह किया जाता है जब इंसान किसी से बहुत प्रेम करता है तो वह कहता है की यह मेरी आंख का तारा है जब कोई प्रिय वस्तु उससे दूर हो जाती है तो वह कहता है तारा बन गया मैं एक ऐसे ही बच्चे की कहानी बताती हूं जो बहुत प्यारी और मासूम है उसको समाज के ऊंच-नीच का का कोई ज्ञान नहीं है बड़ा ही खूबसूरत शब्द है इस शब्द का प्रयोग बहुत जगह किया जाता है जब इंसान किसी से बहुत प्रेम करता है तो वह कहता है की यह मेरी आंख का तारा है जब कोई प्रिय वस्तु उससे दूर हो जाती है तो वह कहता है तारा बन गया मैं एक ऐसे ही बच्चे की कहानी बताती हूं जो बहुत प्यारी और मासूम है उसको समाज के ऊंच-नीच का का कोई ज्ञान नहीं है रिया 5 साल की मासूम बच्ची है जो बहुत प्यारी है और वैसे ही प्यारी प्यारी बातें भी करती है जो सबको बहुत आकर्षित कर लेती हैरिया उसका दिमाग भी बहुत तेज है किसी चीज को समझाने पर झट से समझ जाती है ऐसे समझा कर बात करती है जैसे लगता है किसी ने उसको समझाया है पर दीया की बदकिस्मती है की उसके दादी और पिता जी उससे बिल्कुल प्यार नहीं करते कारण उनको घर का चिराग चाहिए था रिया के पैदा होते उसके पापा और दादी ने उसे रिश्ता तोड़ दिया लेकिन उस मासूम को इस बारे में कुछ भी पता नहीं चला क्योंकि उसके जन्म के बाद ही उसके पिताजी और दादी ने उसे त्याग दिया उन्होंने उसे गोद तक नहीं लिया पैदा होने के बाद ही उसकी नाना नानी ने उसे संभाला और प्यार दिया दुलार दिया औरत की कमी को पूरा करने का प्रयास करने लगे लेकिन कहते हैं ना पिता की जगह कोई नहीं ले सकता बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होने लगा उसे पिता की कमी खलने लगी तब उसकी मां को मजबूरन समाज के खातिर और बेटी की खातिर दूसरी शादी करनी पड़ी उसने सोचा कि शायद मेरी बेटी को पिता मिल जाए लेकिन बेचारी रिया की बदकिस्मती उसको वहां पर भी प्यार,सम्मान और नाम नहीं मिला ना उसकी मां दिला पायी उसने अपनी तरफ से भरपूर कोशिश की इस तरह रिया धीरे-धीरे बड़ी होने लगी तब उसके नाना ने सोचा की बेटी बड़ी हो रही है उसका भविष्य अंधकार मे हो जाएगा इसके लिए वह उसको अपने पास ले आए और प्यार दुलार से पालने लगे क्योंकि वह उससे बहुत प्यार करते थे उसके लिए कुछ भी कर सकते थे क्योंकि वह सच में उनकी आंख का तारा थी और उसके भविष्य को समझने के लिए पूरी कोशिश करने की कोशिश करने लगे वह चाहते थे कि वह इस काबिल हो जाए की सबका हिसाब ले सकें कोई मुकाम पर पहुंच जाए अपनी मां का सहारा बने यही प्रयास उसके नाना नानी करना चाहते हैं
रिया को उसका हक़ और उसका सम्मान हमारे भारत मे आज भी ऐसी बच्ची है जिन्हे अपनी पहचान बनाने के लिए बहुत संघर्ष करने पड़ेगे यह एक सच्ची कहानी है जिसको मैंने महसूस किया है उसकी नानी की आँखों मे हम सभी कहते है बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ यह कैसे संभव होगा जब तक हमारे समाज से यह सोच खतम नहीं होंगी हमें पहले इस सोच को ख़तम करना होगा अपने समाज से आप सभी मेरी बात से सहमत है तो रिया जैसी बच्चियों को उत्साहित कीजिये कि वह बड़े होकर अपने देश का नाम रोशन करें
एक समाज सेवी की कलम से —-

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