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* * @package ThemeGrill * @subpackage ColorMag * @since ColorMag 1.0 */ // Exit if accessed directly. if ( ! defined( 'ABSPATH' ) ) { exit; } ?> दीपोत्सव के पावन पर्व पर भारत के वीर सैनिको को सर्पित कविता-तू दीप तैयार रखना - सरल संवाद

दीपोत्सव के पावन पर्व पर भारत के वीर सैनिको को सर्पित कविता-तू दीप तैयार रखना

त्यौहार पर घर की रौनक रंग रोगन मिठाई तमाशे से ही नहीं होती है।घर पर रौनक घर से बाहर रहने वालों के घर आने से होती है।
अपनी यह भावना देश के लिए समर्पित सैनिक और उनके परिवार को समर्पित है,जो सब कुछ त्याग देश सेवा में लगे रहते हैं और हम उनकी बदौलत जीवन के सब सुख उठाते हैं। भारत माता के वीर सपूतों, सैनिकों को बहुत बहुत आभार।

‘दीपावली’

कह गये हो तुम,आ रहा हूँ मैं
तू दीप तैयार रखना ।
खिल रहे है आज ,गुल गालों पर।
झँकार सी मचल रही ,मनव्यथा।
चौबारे पर माँड आई है,वह माँडना।
दहलीज दरवाजे पर, बाँधे बन्दनवार।
सुगबुगाहट सी है ,ह्रदय अकुलाता है।
मंगल कलश धरा है , दीपों की कतार है।
जगमगा रहे दीप, बस तुम्हारा इंतजार है।
त्यौहार बहुत ,उम्मीद उमंग लाता है।
तुम घर आ जाओ, मनुहार तुमसे मनुहार है।
कितने बरस बीते ,संग दीपावली नही मनाई।
हर त्यौहार पर ही नहीं हर दिन तेरी बहुत याद आई।
गली मुहल्ले में यह खुशी बाँट आई_ तुम दीपावली पर आ रहे हो। खुशी का गहना मैंने पहना है। इस बार भी पता है, यही कहना है मुझे सबसे। आने की चाह उनको भी थी ,घर आने की चाहत
मन रहेगा आहत जानती हूँ धड़कने अपनी _
पर मेरा प्रीतम मुझसे पहले ,देश का रक्षकदार है।
देश के लिए जीना जगमग ,हर दिन दीपावली त्यौहार है।

🙏प्रेषिका
माया मालवेंद्र बदेका
उज्जैन मध्यप्रदेश
स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित

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