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* * @package ThemeGrill * @subpackage ColorMag * @since ColorMag 1.0 */ // Exit if accessed directly. if ( ! defined( 'ABSPATH' ) ) { exit; } ?> कवि "अक्षत" की अक्षय रचना-रमापति राम - सरल संवाद

कवि “अक्षत” की अक्षय रचना-रमापति राम

सरल संवाद। सम्पूर्ण भारतवर्ष मे दीपावली का पावन पर्व बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है, परन्तु इस वर्ष यह पर्व बहुत खास व अलग अंदाज में मनाया जा रहा है। सर्वविदित है कि लगभग 500 वर्ष का वनवास या यूं कहें कि लंबे समय से चला आ रहा संघर्ष इस वर्ष पूर्ण हुआ, और भगवान राम की जन्मस्थली पर भव्य दीपोत्सव के हम सभी सज्जन साक्षी हैं।

दीपोत्सव के इस पर्व पर, श्री राम के जीवन में रमा के प्रथम दर्शन को कवि अक्षत व्यास ने पञ्चचामर छंद के माध्यम से पिरोया है।

“रमापति राम”

रमा व राम वाटिका चले कि पाँव थम गए
सुजान नैन राम को निहारते हि नम गए
रमा व राम प्रेम का नया विधान बन गए
रमा रमी स्व राम में रमा में राम रम गए

प्रसून वाटिका चले सहज सुजान राम जी
सिया दिखी हुए अधीर धीर वान राम जी
रमा स्वयं महा प्रभा सु तेजवान राम जी
कला निधान हैं रमा रमा निधान राम जी

प्रथक शरीर एक प्राण प्रेम का प्रमाण है
रमा हि प्राण राम की रमा के प्राण राम हैं
रमा हि गुनमथान हैं तो राम गुनमथान हैं
रमा निधान का स्वभाव भी रमा समान है

अक्षत व्यास
कवि/ लेखक
वाईस प्रेसिडेंट, सेज स्टूडेंट एक्टिविटी सेल

सम्पूर्ण देशवासियो को कवि अक्षत व सरल संवाद की और से दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं।

One thought on “कवि “अक्षत” की अक्षय रचना-रमापति राम

  • November 20, 2020 at 6:59 am
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    👏🏻👏🏻👌🏻👌🏻👏🏻

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