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* * @package ThemeGrill * @subpackage ColorMag * @since ColorMag 1.0 */ // Exit if accessed directly. if ( ! defined( 'ABSPATH' ) ) { exit; } ?> T.V. पर "प्रो कब्बडी " देखने के बाद जागा खेलने का जुनून - सरल संवाद

T.V. पर “प्रो कब्बडी ” देखने के बाद जागा खेलने का जुनून

सरल संवाद,आपका परिचय आज ऐसे युवा साथियो से करवाएगा, जिन्होंने एक प्रसिद्ध खेल “कब्बडी” को अपनी दिन चर्या का हिस्सा बना लिया,ओर वो कर दिखाया जिसकी हम कल्पना भी नही, कर सकते।

“मेघदूत कब्बडी क्लब”के सदस्य शुभम पाटनकर ने बताया की,आज से लगभग दो-तीन साल पहले टी.वी. पर प्रो कब्बडी देखने से हमारे मन मे भी कब्बडी खेलने का विचार आया ,
फिर विजय नगर स्थित मेघदूत गार्डन में हर रविवार कुछ लोगो ने मिलकर कब्बडी खेलना शुरू किया, तब लोग हम पर हस्ते थे, ओर हमारा मजाक बनाते थे, उनका मानना था, की ये खेल पुराने जमाने का है,

परन्तु,हमारी टीम ने हार नही मानी, ओर नियमित अभ्यास करते रहे और हमने अपने खेलने की टेक्निक में सुधार भी किया, इसीके चलते हमसे बहोत से लोग जुड़ते गए और हमारी टीम बढ़ती गयी,

फिर कुछ समय बाद हमे कोच राकेश यादव सर भी मिल गए इसे संयोग ही कह सकते है,ओर उन्होंने हमें बहोत कुछ सिखाया,,, जिसके चलते हमारे खेल और टेक्निक में तो सुधार हुआ ही, साथ ही क्लब से जुड़े कई सदस्य शहर के बड़े क्लब जैसे- लकी वंडर, विक्रम स्पोर्ट में भी अपनी प्रतिभा दिखा चुके है, ओर इसके अलावा हमारे क्लब के सदस्य चेतन गोरे जी व सूरज जी का आर्मी में भी चयन हुआ है।

हमारे क्लब से जुड़े कई लोगो की जिंदगी बदल गयी और हम शारीरिक ओर मानसिक रूप से तो मजबूत बने ही, साथ मे हमे अलग पहचान भी मिली।

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