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* * @package ThemeGrill * @subpackage ColorMag * @since ColorMag 1.0 */ // Exit if accessed directly. if ( ! defined( 'ABSPATH' ) ) { exit; } ?> किसान-तत्कालीन मुद्दे पर लिखी एक कविता - सरल संवाद

किसान-तत्कालीन मुद्दे पर लिखी एक कविता

किसान

आवाज़ क्या है क्या जानते हो तुम?क्या अपनी खुद की आवाज़ पहचानते हो तुम?
आवाज़ ….तुम्हारी आवाज़.. तुम्हारी मौजूदगी, तुम्हारे होने का वजूद है.. जी रहे हो तुम, जिंदा हो इस बात का सबूत है।

आवाज़ अन्नदाता की, आवाज़ हिन्दोस्तां की
मिट्टी को सोना बनाए आवाज़ उस किसान की

तपती धूप में हल चलाए नींद कभी न उसको भाए
सूखी रोटी खा कर भी बस चिंता खेतों की सताए

कर मेहनत जिसने धरती पर हरी चादर बिछाई है
अपने खून के सींचे से सरहद पर फ़ौज जमाई है

क़त्ल कर उसके स्वपनों का जो ख़ुदा बन बैठा
क्या वो हक़ दिलाएगा जो फैसला सुना बैठा

खेतों से सड़कों पर आया है, उसके हक़ का दाना है
सियासती इन चालों से उसको जीत कर लाना है

तो आवाज़ हमें उठाना है उसकी अस्मत को बचाना है
जो ख़ुद अन्न को तरसे उस अन्नदाता से आवाज़ मिलना है

कुछ औऱ न हमको चाहिए बस इतना बतलाइए
देश की धरती पर हल चलाने वाले का कुछ तो हल निकालिए

©प्रीति पटवर्धन🖋️

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