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* * @package ThemeGrill * @subpackage ColorMag * @since ColorMag 1.0 */ // Exit if accessed directly. if ( ! defined( 'ABSPATH' ) ) { exit; } ?> "विद्यार्थी जीवन"-फार्मासिस्ट सन्दीप मुकाती की रचना - सरल संवाद

“विद्यार्थी जीवन”-फार्मासिस्ट सन्दीप मुकाती की रचना

विद्यार्थी जीवन

परिचय:
विद्यार्थी जीवन किसी भी व्यक्ति के जीवन का अहम और प्रथम पड़ाव होता है इस समय बच्चों का शारीरिक और बौद्धिक विकास होता है. इस समय विद्यार्थी एक कच्चे घड़े के समान होता है जिसको ठोक-पीटकर, सहलाकर किसी भी आकार में ढाला जा सकता है.
इस समय विद्यार्थी को उचित मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है वह उसे विद्यालय में शिक्षकों द्वारा प्राप्त होता है. यही वह समय होता है जब विद्यार्थी को अच्छा-बुरा, सम्मान-असम्मान, गुण-अवगुण इत्यादि का ज्ञान होना प्रारंभ होता है.
इस समय जो विद्यार्थी लगन और मेहनत करके अच्छी शिक्षा हासिल कर लेते है वही आगे आने वाले जीवन में खुशहाल रहते है और एक अच्छे व्यक्तित्व की मिसाल बनते है.
विद्यार्थी शब्द दो शब्दों के योग से बना है- विद्या अथवा अर्थी। इसका अर्थ यह हुआ जो विद्या को प्रयोजन के रूप में ग्रहण करता है, वही विद्यार्थी है। इस प्रकार विद्यार्थी का एकमात्र उदेश्य विद्या की प्राप्ति ही है।
एक सच्चे और आदर्श विद्यार्थी के पाँच प्रमुख लक्षण होते हैं:


‘काक चेष्टा, बको ध्यानं, श्वान निद्रा तथैव च।
अल्पाहारी, गृहत्यागी,पंच विद्यार्थी लक्षणम्।।
वे इस प्रकार हैं- कौए की चेष्टा करना, बगुले की तरह ध्यान देना, कुत्ते की तरह नींद लेना, अल्पाहारी और गृहत्यागी ही विद्यार्थी के पाँच प्रमुख लक्षण हैं। इस प्रकार एक वास्तविक विद्यार्थी के गुण और स्वरूप सचमुच में अद्भुत और बेमिसाल होते हैं।


विद्यार्थी का पहला मकसद विद्या ग्रहण पर ध्यान:
एक सच्चा विद्यार्थी शिक्षकों द्वारा दी गई शिक्षा को मंत्रमुग्ध होकर सुनता है तथा समझ में ना आने पर शिक्षको से बार-बार पूछ कर शिक्षा ग्रहण करता है, एक सच्चा और ईमानदार विद्यार्थी हमेशा विद्या को पाने की लालसा रखता है वहां हर जगह से ज्ञान को बटोर लेता है एक सच्चा विद्यार्थी अनुशासन में रहता है अपने शिक्षकों का सम्मान करता है तथा अपने शिक्षकों द्वारा दी गई शिक्षा को अपने मस्तिष्क में ऐसे समाहित करता है जैसे कि सीप में मोती। एक आदर्श विद्यार्थी शिक्षकों द्वारा दिए गए कार्य को खुशी से करता है और उसे करके उसे दुगनी खुशी मिलती हैं और वहां ध्यान और आत्मा से उन चीजों को सीखता है यही एक आदर्श विद्यार्थी के गुण हैं।


नींद के प्रति जागरूक:
एक सच्चा विद्यार्थी हमेशा अपनी शिक्षा के प्रति जागरूक होता है वहां अपने नियम खुद बनाता है और उन नियमों का पालन करता है। इन्हीं नियमों में एक नियम होता है सोने का नियम विद्यार्थी अपने सोने का समय निश्चित कर लेता है और वहां उसी समय पर सोता है तथा उसी समय पर जग जाता है ऐसे नियमों से चलने वाले विद्यार्थी अपने जीवन में आसमान की बुलंदियों को छूते हैं।
आदर्श विद्यार्थी अपने मस्तिष्क को अपने वश में करके रखता है। आदर्श विद्यार्थी को पता है कि वहां नींद के प्रति जागरूक नहीं रहा तो वहां ठीक से शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाएगा।


आदर्श विद्यार्थी का भोजन:
एक सच्चा और आदर्श विद्यार्थी हमेशा सादा भोजन करता है उसे पता है कि अगर वहां सादा भोजन नहीं करेगा और वहां भारी भोजन करेगा तथा पेट भर के भोजन करेगा तो उसे नींद शिक्षा ग्रहण नहीं करने देगी और वहां अपने बनाए हुए नियमों का पालन नहीं कर पाएगा इसलिए विद्यार्थी का भोजन हमेशा हल्का भोजन होना चाहिए। एक आदर्श विद्यार्थी अपने नियम में भोजन को भी रखता है विद्यार्थी अपने भोजन की सूची बनाता है तथा सभी आवश्यक पदार्थ अपने साधे भोजन में रखकर खुशी से अपनी शिक्षा ग्रहण करता है। अनुशासन और नियम ही एक आदर्श विद्यार्थी के गुण हैं।

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