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* * @package ThemeGrill * @subpackage ColorMag * @since ColorMag 1.0 */ // Exit if accessed directly. if ( ! defined( 'ABSPATH' ) ) { exit; } ?> "पहला सुख निरोगी काया"-कृतिका माहेश्वरी - सरल संवाद

“पहला सुख निरोगी काया”-कृतिका माहेश्वरी

सरल संवाद।स्वस्थ रहना परम सुख- पुरानी कहावत है,कि “पहला सुख निरोगी काया” अर्थात शरीर का स्वस्थ रहना ही सबसे बड़ा सुख हैं, सारे सुख शरीर द्वारा भी भोगे जाते हैं. अतः शरीर रोगी हो तो सारे सुख बेकार हैं. स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मस्तिष्क अर्थात स्वस्थ मन का होना संभव हैं. तन और मन दोनों के स्वस्थ रहने पर ही, मनुष्य जीवन सच्चा सुख भोग सकता हैं.
स्वस्थ जीवन के लाभ- स्वस्थ जीवन ईश्वर का वरदान हैं. स्वस्थ व्यक्ति ही जीवन के सुखों का उपभोग कर सकता हैं. स्वस्थ व्यक्ति ही अपने सारे दायित्व समय से पूरा कर सकता है. समय पड़ने पर औरों कि भी सहायता कर सकता है. शरीर स्वस्थ और बलवान होता है. तो ऐसे वैसे लोग बचकर चलते है नहीं तो. तिनि दबावत निबल को, राजा पातक रोग
स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता हैं. तन और मन से स्वस्थ व्यक्ति किसी पर भार नहीं होता बल्कि औरों के भार को भी हल्का करने में सहायक होता हैं. स्वस्थ व्यक्ति ही सेवाओं में प्रवेश पा सकता हैं. स्वस्थ नागरिक ही देश कि शक्ति होते हैं. स्वस्थ व्यक्तियों का परिवार सदा आनन्दमय जीवन बिताता हैं.

कृतिका माहेश्वरी
नलखेड़ा मध्य प्रदेश
स्कूल टीचर, आर्ट ऑफ लिविंग ओर चिल्ड्रेन ऑफ मदर अर्थ सोशल वेलफेर सोसाइटी मे समाज़ सेविका,|

One thought on ““पहला सुख निरोगी काया”-कृतिका माहेश्वरी

  • December 22, 2020 at 1:39 pm
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    Wowww diii amazing

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