ऑनलाइन पढ़ाई लाभदायक है या घातक-अमिता मराठे जी

सरल संवाद।वर्तमान समय आॅनलाइन पर सवार है। लोग हर कार्य आॅनलाइन से सम्पन्न करने में जुटे हैं।वाकई में इस नई तकनीक ने जन जीवन में कमाल का बदलाव ला दिया है।
शिक्षा के क्षेत्र में भीइसका बहु प्रचलन है ।

इस पद्धति पर विचार करने के पूर्व हम जाने कि शिक्षा का हमारे जीवन में क्या महत्व है ? शिक्षा का प्रयोजन क्या है?
भारतीय संस्कृति में शिक्षा का मूल आधार आधिदैविक,आधिभौतिकऔर आध्यात्मिक धरातल है। लेकिन आज की शिक्षा में व्यक्ति स्वधर्म की खोज नहीं कर सकता।पेट भरने के प्रयोजन से शिक्षा दी जाती है। शिक्षा का हेतु है स्वयं को स्वयं का परिचय कराना , स्वयं में सामर्थ्य पैदा करना है। शिक्षा से स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त करना है।
शिक्षा का लक्ष्य सम्पूर्ण व्यक्तित्व विकास है। इसमें ज्ञान और विज्ञान होना चाहिए। ज्ञान वह जो विज्ञान की जानकारी करवाता है।
शिक्षा से समाज और राष्ट्र का निर्माण और विकास करना चाहते हैं तो पहली आवश्यकता है- व्यक्ति* का निर्माण।आज की शिक्षा में यह कार्य नहीं हो रहा है।मानव मूल्यों को शिक्षा से पोषण प्राप्त होना चाहिए। व्यक्ति का सामर्थ्य बढ़ेगा तब राष्ट्र समर्थ होगा। शिक्षा में आध्यात्म का समावेश होना आवश्यक है। जब से शिक्षा साधनों में आॅनलाइन पद्धति प्रारम्भ हुई तब से नई जानकारी की उर्जा से तथा मोबाइल, लेपटॉप, कम्प्यूटर आदि दमदार साधनों के इस्तेमाल से आज का हर वर्ग ,हर क्षेत्र तीव्र गति से विकसित हो रहा है। लेकिन विश्व की भयानक समस्या कोरोनावायरस के प्रसार ने इंसान को स्व परिवर्तन के लिए बाध्य कर दिया है। मनुष्य से जुड़ा प्रत्येक क्षेत्र प्रभावित हैं। जिसमें सबसे बड़ी समस्या बच्चों का भविष्य है।लोग घरों में बन्द है।शिक्षालय भी विगत छः मास से बन्द पड़े हैं। मौत के भय से दुबके बाल युवा वृद्ध अनेक गहरी, समस्याओं से गुजर रहें हैं।

निराकरण करते हुए देश की सरकार तथा बुध्दि जीवियों की सलाह से वर्क फ्राम होम, आॅनलाइन ट्रेनिंग, पढ़ाई, आदि की सहायता से जन जीवन अस्त-व्यस्त होने से बचाने की कोशिश की जा रही है।
किसी भी पद्धति के दो पहलू अवश्य होते हैं अच्छे व बुरे । आॅनलाइन पढ़ाई के फायदे जरुर है लेकिन उससे नुकसान भी उतने ही ज्यादा है।
जिस शिक्षा का अर्जन मुक्ताकाश के , पेड़ों की छांव में बैठकर लेने का अभूतपूर्व आनन्द हम न ले तो व्यक्ति स्वतंत्र नहीं हो सकता।

विद्यालय का वातावरण और वहां की गतिविधियों से छात्र वंचित हो रहे हैं।घर में ही आॅनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं।नवीनता का स्वागत जरुर है किन्तु शारीरिक दृष्टि से, बौध्दिक दृष्टि से जो अनुकूल प्रभाव चाहिए उसकी प्राप्ति नहीं हो पाती।तो हम देखें यह पद्धति जितनी लाभदायक हैं उतनी घातक भी है।

1 👉 लगातार आॅनलाइन पढ़ाई सेहत के लिए उचित नहीं। आंखों का पानी सुखता है। नेत्र समस्यायें आती है।
2 👉 सिलेबस पूरा नहीं हो पाता। घंटों मोबाइल पर काम करने से स्पाइन की दिक्कत आती है।
3 👉 सिर दर्द की समस्या, जिससे मेडम द्वारा बताई पढ़ाई का बहुत सा भाग छूट जाता है।
4 👉 थकान, कमजोरी, चिड़चिड़ापन हावी हो जाता है।
5 👉 होम वर्क पूरा करने में तथा पढ़ाई के समय छोटी कक्षा के बच्चों के लिए माता-पिता को अलर्ट रहना पड़ता है।
नौकरी पेशा माता-पिता परेशानियों का सामना कर रहें हैं।
6 👉 बच्चों के भविष्य को देखकर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोलॉजी विभाग के गहन अध्ययन से विदित होता है कि यह पढ़ाई किस कदर घातक हैं।
यह समस्या पता नहीं कितने समय तक भुगतना पड़ेगी। समस्या का कारण भी इंसान होता है निराकरण भी इंसान को करना पड़ता है।
कोरोना संक्रमण से लोग मर रहे हैं । इसलिए हमें घर पर ही बच्चों की , युवा पीढ़ी की, बुजुर्गों की सम्भाल करनी है।
मोबाइल को लेपटॉप या एल ईडी से कनेक्ट कर पढाये। गांव के बच्चों के भविष्य पर जरूर प्रश्न चिन्ह उभरता है, क्यों कि उनके पास आधुनिक तकनीक उपलब्ध नहीं होती। शहरों में आकर पढ़ने वाले छात्रों की पढ़ाई भी पिछड़ रहीं है।
शिक्षकों को नया अनुभव मिल रहा है। जूम, एवं घर बैठे पढ़ाने का शुरू में आनन्द जरुर महसूस हुआ।लेकिन उन्होंने देखा सभी लाभान्वित नहीं हो पाते । पढ़ाई का कक्षा में जो सार्थक रुप है वह घर से नहीं मिल पाता।
सर्वेक्षण में पाया गया कि पालको ने, शिक्षको ने ,छात्रों ने आॅनलाइन पढ़ाई के घातक परिणाम ही अधिक दिखाएं तथा कहा है कि सभी के शारीरिक मानसिक विकास पर अनुचित प्रभाव पड़ रहे हैं। नियमित रूप से यह पद्धति उपयुक्त नहीं।
ऐसी परिस्थिति में अभिभावक बच्चों को क्लास ज़रुर अटैंड कराएं और अगर कोई परेशानी हैं तो उनके शिक्षकों से सम्पर्क कर उसे दूर करने का प्रयास करें।
बच्चों का मन लगे इसके लिए जरूरी है कि शिक्षक क्लासेस के बीच में कुछ क्रिएटिव एक्टिविटीज करवाये।
प्रेक्टिकल पर ध्यान दें।अभिभावक भी नयी तकनीक का पर्याप्त ज्ञान ले जिससे बच्चों के साथ तालमेल कर सके।
वैसे भी आॅनलाइन कक्षाएं कक्षा से बेहतर नहीं है, क्यों कि हमारे देश में कई बच्चे ग़रीब हैं जो आॅनलाइन संसाधन को जुटाने में असमर्थ है। जिससे उनकी पढ़ाई का नुक़सान ही हो रहा है।
अतः यह जाने कि हमारी पुरानी संस्कृति हमारा गर्व है।बाकी नयापन एक प्रवाह है जो समय के साथ गुजर जाएगा। ध्यान रहे हमारे बच्चे देश के कर्णधार हैं, उन्हें संरक्षण देकर उचित शिक्षण प्रशिक्षण देना जरूरी है।अखंड भारत की महिमा स्वर्णिम है।

अमिता मराठे
इंदौर
स्व रचित

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